“नेता बनने की होड़ सी लगी"

आज कल तो लगता हे जैसे नेता बनने की होड़ सी लगी हे, आज पूरा भारत किसी न किसी बहाने से जल रहा हे. अनामत के नाम से हर राज्य में आग सी लगी हुई हे, ये सब नेता बनने के लिए करते हे. लेकिन सत्य यही हे की उनको समाज और देश की चिंता हे ही नहीं, अगर होती तो ये सब नामुमकिन हे. उनको पता हे तो भी ये करते हे, उसका मतलब क्या हे ये आप सब जानते हो.
हमारा संविधान देश चलने का लिखित दस्तावेज हे उससे छेड़छाड़ प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति या सुप्रेमेकोर्ट नहीं कर शकती.
में रात भर इसलिए जगता हु क्यूंकि मुझे नया सवेरा लाना हे,और देश को जगाना हे.



“स्मार्ट सिटी के लिए करोडो रुपये की घोषणा"

आज देश में स्मार्ट सिटी के लिए करोडो रुपये की घोषणा होती हे. आज गाव का किसान, मज़दूर आदमी भेदभाव की निति का शिकार हे, जब फसल की पैदावार होती हे तब सभी चीजों के दाम कम हो जाते हे, फिर कुछ महीनो के बाद व्यापारी संग्रह खोरी करते हे, तब दाम आसमान को छूने लगते हे. किसानो को खर्च के पैसे भी उस पैदावार से मिलते नहीं. और सडको पर फेकने से मजबुर हो जाते हे. किसानो के इतने के लिए हर तहसील में कोल्ड स्टोरेज होना चाहिए.
किसानो के अनगिनत संगठन हे फिर भी इस समस्या का हल आज दिन तक नहीं निकाल सके, मुझे इस पर अफ़सोस हे. बस वे भी उन नेताओ की तरह दोगली नेतागिरी ही करते हे.
जय जवान जय किसान का खाली नारा ही रह गया हे.



“एक देश तिन नाम -अगल अलग राज्य के लिए अलग अलग कनून"

जब तक गाव का विकास नहीं होगा, तब तक देश का विकास नहीं होगा गाँधी जी का कहना था सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि गाव से ही आते हे हर MLA और सांसदोंको अपने क्षेत्र के विकास के लिए करोडो रूपये की सहाय दिए जाते हे फर्क बस इतना ही रहता हे वो कागज पर ही रहती हे. मॉल सबकुछ नेता-अधिकारी ओ की जेब में जाता हे. और गाव अपनी जगह रहता हे जनता सब जानती हे लेकिन समजना नहीं चाहती, इलेक्शन आते ही सब भूल जाते हे नाती,जाती,धर्म के नाम पर एक ऐसे ही दुसरे को बेठा देती हे ये सब २६/०१/१९५० से सब चल रहा हे ये हमें बदलना हे.

देश हित के लिए और समाज हित के लिए कितने NGO देशमे चल रहे हे. आज़ादी के बाद कितनी योजनाए आई कितने रूपये देशके विकास कार्य में खर्च किये. लेकिन कोई समाज और देशका विकास ये NGO ने नहीं किया देश में साहस करने वाले अपने परिवार के गुजरान के लिए अपनी मेहनत और लगन से जो अच्छा जीवन जीते हे वो अपनी मेहनत और लगन का हे बाकि NGO और जो सरकार में होता हे उसका विकास होता हे.

२६/१/१९५० से मतका अधिकार देते हुए हमें लोकतंत्र में राजा बनाया गया हे. और हम वोट देके विधान सभ्य और साँसदोको सेवक के रूप में भेजते हे.

सभी मतदाता देशका मालिक हे और जनप्रतिनिधि जनता का सेवक हे. लेकिन आज जनप्रतिनिधि पक्ष पार्टीका हे. और देशका मालिक बन बेठे हे, और हमें सेवक बना दिया हे, इसको हमें बदलना होगा सब समजते हुए वो ना समजे तो हमें अपने वोटका सही इस्तमाल करके या बहिस्कार करके पक्ष पार्टी और नेता को लोक तंत्र क्या हे वो बताना हे.

एक आदमी को अपनी आइदेंती के लिए ६-७ प्रूफ देने पड़ते हे और नेता लोग जो कहते हे वो हमें टाइम बिगाडके लाइन में खड़ा रहना पड़ता हे. भारत के लोकतंत्र में आदमी की केशी विडंबना, ये सब बिना बोले सहन करना पड़ता हे.

आदमी अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए सुबह से शाम तक जजुमता हे और अपने परिवार का पालन पोषण करता हे उसे उस राजनीतिसे कोई लेना देना नहीं हे वो सब अपने परिवार,समाज और गाव की चिंता करता हे.

में उन सबको कहना चाहता हु की जितनी आपको आपने परिवार-समाज की चिंता करते हुए और आने वाली पिढ़ी के लिए उज्वल भविष्य के लिए सहीमाँ लोगो से चलने वाला लोकतंत्र चाहिए तो उन पार्टी नेता बन बेठे लोग और १९५० से अब तक देश पर राज किया हे और देश को लुटा अपने मन में आया वो कनून लाये देश के लोगो को परेशान किया हमने बहुत सहन कर लिया और अब न सहेंगे. उन नेता ओ और ‌‍भ्रषट अधिकारीओ को लोक तंत्र की सही ताकत हमें दिखानी हे.

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