१८५७ से १९४७ तक लाखो लोगो ने बलिदान देकर और जेल की यातनऐ सहकर इस देश को आजाद करवाया.

हम उसकी क़ुरबानी व्यर्थ जाने देंगे तो उनकी आत्मा को ठेस पहोचेगी. हम उन शहीदों की क़ुरबानी व्यर्थ नही जाने देंगे. हम अहिंसा के रास्ते उन पक्ष-पार्टीओ को वोट ना देते हुए सही उम्मीदवार को संसद में भेजेंगे. अगर उस पर भी सता का नशा चडता है तो राईट टू रिजेक्ट जैसा कानून होना चाहिए.

आज गाव में प्राथमिक सुविधा जीसे की स्कूल, आरोग्य, बैंकिंग जैसी सुविधाओ का अभाव है. और सबसे अधिक संसद M.L.A चुनाव लड़कर विधानसभा और संसद में जाते हे. और अपने मत क्षेत्र का कभी ख्याल नहीं करते, बस जब चुनाव आता है तो वोट की भीख मांगने आते है. और उनका हम गर्मजोशी से स्वागत करते है, जैसे की हमारा मसीहा आ गया हो.

ये हमारी मज़बूरी नहीं आदत बन गई हे देश में ९९% लोग को कभी इन नेताकी जरूरत नहीं होती जरूरत उद्योग पति और करप्तप्सन करते हे उनको इन नेताओ की जरुरत होती हे,हमतो जेसे नेताओके आधीन हो गए हे इसे रहते हे उनके कहने पे जहा पार्टीका अधीवेसन हो, बन्ध का एलान किआ हो, रेलिओमें अपना कीमती समय और पैसा दोनों खर्च करके जाते हे, जरुरत उन्हें होती हे हमारी, उसे हमें बदलना होगा.

गाव की हर मिल्कत का मालिक गाव है. केन्द्र और राज्य को गाव कोई मिल्कत लेनी होगी तो उसको ग्राम्य सभा की अनुमति के बिना नहीं ले सकता.एसा कानून होना चाहिए,तभी सही लोकतंत्र आएगा.



आज देश में स्मार्ट सिटी के लिए करोडो रुपये की घोषणा होती हे. आज गाव का किसान, मज़दूर आदमी भेदभाव की निति का शिकार हे, जब फसल की पैदावार होती हे तब सभी चीजों के दाम कम हो जाते हे, फिर कुछ महीनो के बाद व्यापारी संग्रह खोरी करते हे, तब दाम आसमान को छूने लगते हे. किसानो को खर्च के पैसे भी उस पैदावार से मिलते नहीं. और सडको पर फेकने से मजबुर हो जाते हे. किसानो के इतने के लिए हर तहसील में कोल्ड स्टोरेज होना चाहिए. किसानो के अनगिनत संगठन हे फिर भी इस समस्या का हल आज दिन तक नहीं निकाल सके, मुझे इस पर अफ़सोस हे. बस वे भी उन नेताओ की तरह दोगली नेतागिरी ही करते हे.

जय जवान जय किसान का खाली नारा ही रह गया हे.